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हरियाली तीज 2026: पूजा से लेकर Outfit और Mehndi तक पूरी तैयारी

हरियाली तीज का इंतजार खासतौर पर उन महिलाओं को रहता है, जो इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ सोलह श्रृंगार, मेहंदी, नए कपड़े, झूले और तीज की पारंपरिक रस्मों के लिए खास तैयारी करती हैं। लेकिन अक्सर त्योहार के एक-दो दिन पहले ही हमे समझ आता है कि पूजा का सामान भी लेना है, मेहंदी भी लगवानी है और Outfit भी तैयार करना है। अगर आप भी हरियाली तीज 2026 की तैयारी कर रही हैं, तो इस बार आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के लिए पहले से पूरी तैयारी कर लें। इस लेख में आपको हरियाली तीज की तारीख और तिथि से लेकर पूजा सामग्री, व्रत, सिंधारा, सोलह श्रृंगार, Outfit, Mehndi और घर की सजावट तक की जानकारी एक ही जगह मिलेगी। हरियाली तीज 2026 कब है? साल 2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से जुड़ा पर्व है। उपलब्ध पंचांग विवरण में तृतीया तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे और समाप्ति 15 अगस्त 2026 को शाम 5:28 बजे बताई गई है। तिथि और पूजा के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जरूर मिलाएं...
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निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 7 गलतिया टूट सकता है व्रत

ह मारे सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और सर्वोच्च माना गया है। मान्यता है कि यदि आप साल भर की कोई भी एकादशी नहीं रख पाते हैं, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने से आपको साल की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य मिल जाता है।चूकि यह व्रत बिना पानी और बिना अन्न के रखा जाता है, इसलिए इसके नियम बेहद कड़े होते हैं। कई बार लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतिया कर बैठते हैं जिससे उनका व्रत खंडित हो जाता है। अगर आप भी इस साल यह पवित्र व्रत रख रहे हैं, तो इन 7 बड़ी गलतियों के बारे में ज़रूर जान लें ताकि आपको व्रत का पूरा फल मिल सके। निर्जला एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और परण का समय [निर्जला एकादशी का व्रत  25 जून 2026 दिन (गुरुवार) को है] [एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जून 2026 को शाम 06:12 मिनिट से  25 जून 2026 को रात 08:09 मिनिट तक] [व्रत खोलने का समय  (पारण का समय) 26 जून 2026 को सुबह 05:25 से 08:13 के बीच।] निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 7 गलतियाँ 1. दशमी की रात को भारी भोजन करना...

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत किस तिथि को किया जाता है? सही उत्तर, नियम और संपूर्ण जानकारी

य दि आप जानना चाहते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत किस तिथि को किया जाता है तो इसका सीधा और प्रामाणिक उत्तर है प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि (13वें दिन) को किया जाता है । हमारे हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष और इन दोनों ही पक्षों की त्रयोदशी को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए यह उपवास रखने का विधान है। त्रयोदशी तिथि और प्रदोष व्रत की पंचांग गणना पंचांग के गणित के अनुसार, चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर पूरे महीने को 30 दिनों में बांटा जाता है।  अमावस्या के के बाद जब चंद्रमा बड़ा होता है तो उसे शुक्ल पक्ष कहते हैं, और पूर्णिमा के बाद जब चंद्रमा छोटा होता है तो उसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। इन दोनों पक्षों के 13वें दिन को त्रयोदशी कहा जाता है। और यह व्रत दोनों पक्षों में आता है, इसलिए एक साधारण हिंदू वर्ष (12 महीने) में कुल मिलाकर 24 प्रदोष व्रत होते हैं। परंतु जिस वर्ष पंचांग में अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) जुड़ता है, उस विशेष साल में दो व्रत बढ़ जाते हैं और कुल संख्या 26 हो जात...

पीरियड के कितने दिन बाद पूजा कर सकते हैं? | क्या पीरियड में पूजा करना चाहिए? पूरी जानकारी

पीरियड के दौरान पूजा कर सकते हैं या नहीं, यह सवाल लगभग हर महिला के मन में आता है। खासकर जब एकादशी, सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत या कोई बड़ा त्योहार हो। आज हम शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार जानेंगे कि पीरियड में पूजा करने के क्या नियम हैं और कितने दिन बाद पूजा शुरू कर सकते हैं। हमारे हिंदू धर्म के अनुसार कोई भी महिला मासिक धर्म यानी पीरियड के दौरान चौथे दिन बाल धोकर व पूरी तरह से पवित्र होकर पूजा पाठ शुरू कर सकती हैं। क्या पीरियड में पूजा कर सकते हैं? हमारी माता और बहनों का पहला सवाल यही होता है कि अभी पीरियड चल रहे हैं, तो घर की पूजा कर सकते हैं या नहीं, तो जवाब है नहीं क्योंकि मासिक धर्म में आपको शररिक पूजा जैसे की मंदिर में पूजा पाठ या मूर्ति व पूजा की सामग्री को छुना बिल्कुल मना होता है। लेकिन आप मन से और सच्ची श्रद्धा से ईश्वर से प्रार्थना या फिर नाम जप तो कर ही सकती हैं। और हां जरूरी बात पीरियड के दौरान आपको आराम करने की सलाह दी  जाती हैं। और हां ईश्वर भाव के भूखे होते हैं। इसलिए यदि सच्ची श्रद्धा और भक्ति हो तो मानसिक पूजा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्या पीरियड के चौथ...

योगिनी एकादशी 2026: 10 जुलाई को व्रत या 11 जुलाई को? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय

जुलाई 2026 में एकादशी कब है  देखी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ही हम योगिनी एकादशी कहते हैं, इस वर्ष सामान्य योगिनी एकादशी 10 जुलाई को और गौण योगिनी एकादशी 11 जुलाई को मनाई गई, आप के मन में आ रहा होगा कि हम किस दिन एकादशी व्रत रखे, तो हमारा जवाब है 10 जुलाई को ही व्रत रखे, आईए हम आप को विस्तार से समझाते हैं। योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार को सुबह 08:16 से लेकर 11 जुलाई 2026 दिन शनिवार को सुबह 05:22 तक रखा जाएगा [ इस व्रत का परण ( व्रत तोड़ने) का समय 11 जुलाई को दोपहर 1:50 मिनट से 4:36 मिनट तक रहेगा ] गौण योगिनी एकादशी का व्रत 11 जुलाई दिन शनिवार को सुबह प्रारम्भ होगा और 12 जुलाई को को व्रत के परण तक रहेगा [ इस व्रत का परण ( व्रत तोड़ने) का समय सुबह 5:32 मिनट से 8:18 मिनट तक रहेगा। एकादशी का व्रत कैसे मनाया जाता है देखिये एकादशी का व्रत सभी व्रतों का राजा है, इस लिये इस यह व्रत थोड़ा कठिन होता है, इस दिन आपको पूरी तरीके से अन(रोटी, चावल, दाल, सब्जी) का त्याग करना पड़ता है, साथी आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा आरा...

वट पूर्णिमा कब है? 2026 में जानिए सही तारीख,शुभ मुहूर्त, पूजा कि विधि और इस दिन क्या ना खरीदे।

हमारे सनातन धर्म और धार्मिक कलेंडर के अनुसार वट पूर्णिमा का व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा को मनाया जाता है, इस दिन सुहागन महिलाएं वट यानी कि (बरगद) के पेड़ कि पूजा करती हैं, हमारे धर्म ग्रंथो के अनुसार इस दिन जो भी स्त्री बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं तथा यमराज से अपने पति के प्राण वापस लाने वाली माता सावित्री की कथा को पड़ती या सुनती हैं उन महिलाओं की पति की आयु लंबी तथा अच्छे स्वास्थ्य का वरदान मिलता हैं। वट पूर्णिमा कब है हमारे हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष यानी कि 29 जून 2026 को सुबह 6:12 से लेकर 30 जून को 4:25 तक रहेगा अब सबसे जरूरी है शभ मुहूर्त जो कि (सोमवार) को 29 जून से सुबह 8:50 से दोपहर को 1:45 तक बहुत ही शुभ योग है। वट पूर्णिमा पर भूलकर भी न खरीदें ये चीजें अक्सर महिलाएं व्रत की तैयारी में अनजाने में कुछ ऐसी चीज़ें खरीद लेती हैं, जिससे पूजा का फल नष्ट हो जाता है। वट पूर्णिमा के दिन सुहागिन स्त्रियों को इन चीज़ों को खरीदने से बचना चाहिए। काले या नीले रंग के वस्त्र और चूड़ियाँ:   देखिये वट पूर्णिमा सौभाग्य का पर्व है।...

निर्जला एकादशी व्रत कि कथा 2026: आखिर भीम के कारण क्यों पड़ा इसका नाम भीमसेनी एकादशी? जानिए यह पौराणिक कहानी

 सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) कहा जाता है। यह साल की सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन यानि दूसरे दिन (द्वादशी) को सूर्योदय तक पानी की एक बूंद भी आप ग्रहण नहीं कर सकते। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति साल भर में किसी भी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता और यदि ओ सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा से रख ले, तो उसे पूरे साल की सभी एकादशियों का पुण्य फल एक साथ मिल जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पावन व्रत को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी क्यों कहा जाता है? पौराणिक निर्जला एकादशी व्रत कथा (Nirjala Ekadashi Vrat Katha in Hindi) पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास जी के पास जाकर अपनी व्यथा सुनाई। भीम ने कहा हे परम आदरणीय पितामह! मेरे परिवार के सभी लोग माता कुंती, भ्राता युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी हर एकादशी को भगवान विष्णु का व्रत रखते हैं और मुझे भी अन्न न खाने की सलाह देते हैं। परंतु मैं भगवान जनार्दन की भक्...