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निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 7 गलतिया टूट सकता है व्रत

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ह मारे सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और सर्वोच्च माना गया है। मान्यता है कि यदि आप साल भर की कोई भी एकादशी नहीं रख पाते हैं, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने से आपको साल की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य मिल जाता है।चूकि यह व्रत बिना पानी और बिना अन्न के रखा जाता है, इसलिए इसके नियम बेहद कड़े होते हैं। कई बार लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतिया कर बैठते हैं जिससे उनका व्रत खंडित हो जाता है। अगर आप भी इस साल यह पवित्र व्रत रख रहे हैं, तो इन 7 बड़ी गलतियों के बारे में ज़रूर जान लें ताकि आपको व्रत का पूरा फल मिल सके। निर्जला एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और परण का समय [निर्जला एकादशी का व्रत  25 जून 2026 दिन (गुरुवार) को है] [एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जून 2026 को शाम 06:12 मिनिट से  25 जून 2026 को रात 08:09 मिनिट तक] [व्रत खोलने का समय  (पारण का समय) 26 जून 2026 को सुबह 05:25 से 08:13 के बीच।] निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 7 गलतियाँ 1. दशमी की रात को भारी भोजन करना...

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत किस तिथि को किया जाता है? सही उत्तर, नियम और संपूर्ण जानकारी

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य दि आप जानना चाहते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत किस तिथि को किया जाता है तो इसका सीधा और प्रामाणिक उत्तर है प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि (13वें दिन) को किया जाता है । हमारे हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष और इन दोनों ही पक्षों की त्रयोदशी को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए यह उपवास रखने का विधान है। त्रयोदशी तिथि और प्रदोष व्रत की पंचांग गणना पंचांग के गणित के अनुसार, चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर पूरे महीने को 30 दिनों में बांटा जाता है।  अमावस्या के के बाद जब चंद्रमा बड़ा होता है तो उसे शुक्ल पक्ष कहते हैं, और पूर्णिमा के बाद जब चंद्रमा छोटा होता है तो उसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। इन दोनों पक्षों के 13वें दिन को त्रयोदशी कहा जाता है। और यह व्रत दोनों पक्षों में आता है, इसलिए एक साधारण हिंदू वर्ष (12 महीने) में कुल मिलाकर 24 प्रदोष व्रत होते हैं। परंतु जिस वर्ष पंचांग में अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) जुड़ता है, उस विशेष साल में दो व्रत बढ़ जाते हैं और कुल संख्या 26 हो जात...

पीरियड के कितने दिन बाद पूजा कर सकते हैं? | क्या पीरियड में पूजा करना चाहिए? पूरी जानकारी

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पीरियड के दौरान पूजा कर सकते हैं या नहीं, यह सवाल लगभग हर महिला के मन में आता है। खासकर जब एकादशी, सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत या कोई बड़ा त्योहार हो। आज हम शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार जानेंगे कि पीरियड में पूजा करने के क्या नियम हैं और कितने दिन बाद पूजा शुरू कर सकते हैं। हमारे हिंदू धर्म के अनुसार कोई भी महिला मासिक धर्म यानी पीरियड के दौरान चौथे दिन बाल धोकर व पूरी तरह से पवित्र होकर पूजा पाठ शुरू कर सकती हैं। क्या पीरियड में पूजा कर सकते हैं? हमारी माता और बहनों का पहला सवाल यही होता है कि अभी पीरियड चल रहे हैं, तो घर की पूजा कर सकते हैं या नहीं, तो जवाब है नहीं क्योंकि मासिक धर्म में आपको शररिक पूजा जैसे की मंदिर में पूजा पाठ या मूर्ति व पूजा की सामग्री को छुना बिल्कुल मना होता है। लेकिन आप मन से और सच्ची श्रद्धा से ईश्वर से प्रार्थना या फिर नाम जप तो कर ही सकती हैं। और हां जरूरी बात पीरियड के दौरान आपको आराम करने की सलाह दी  जाती हैं। और हां ईश्वर भाव के भूखे होते हैं। इसलिए यदि सच्ची श्रद्धा और भक्ति हो तो मानसिक पूजा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्या पीरियड के चौथ...

योगिनी एकादशी 2026: 10 जुलाई को व्रत या 11 जुलाई को? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय

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जुलाई 2026 में एकादशी कब है  देखी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ही हम योगिनी एकादशी कहते हैं, इस वर्ष सामान्य योगिनी एकादशी 10 जुलाई को और गौण योगिनी एकादशी 11 जुलाई को मनाई गई, आप के मन में आ रहा होगा कि हम किस दिन एकादशी व्रत रखे, तो हमारा जवाब है 10 जुलाई को ही व्रत रखे, आईए हम आप को विस्तार से समझाते हैं। योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार को सुबह 08:16 से लेकर 11 जुलाई 2026 दिन शनिवार को सुबह 05:22 तक रखा जाएगा [ इस व्रत का परण ( व्रत तोड़ने) का समय 11 जुलाई को दोपहर 1:50 मिनट से 4:36 मिनट तक रहेगा ] गौण योगिनी एकादशी का व्रत 11 जुलाई दिन शनिवार को सुबह प्रारम्भ होगा और 12 जुलाई को को व्रत के परण तक रहेगा [ इस व्रत का परण ( व्रत तोड़ने) का समय सुबह 5:32 मिनट से 8:18 मिनट तक रहेगा। एकादशी का व्रत कैसे मनाया जाता है देखिये एकादशी का व्रत सभी व्रतों का राजा है, इस लिये इस यह व्रत थोड़ा कठिन होता है, इस दिन आपको पूरी तरीके से अन(रोटी, चावल, दाल, सब्जी) का त्याग करना पड़ता है, साथी आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा आरा...

वट पूर्णिमा कब है? 2026 में जानिए सही तारीख,शुभ मुहूर्त, पूजा कि विधि और इस दिन क्या ना खरीदे।

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हमारे सनातन धर्म और धार्मिक कलेंडर के अनुसार वट पूर्णिमा का व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा को मनाया जाता है, इस दिन सुहागन महिलाएं वट यानी कि (बरगद) के पेड़ कि पूजा करती हैं, हमारे धर्म ग्रंथो के अनुसार इस दिन जो भी स्त्री बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं तथा यमराज से अपने पति के प्राण वापस लाने वाली माता सावित्री की कथा को पड़ती या सुनती हैं उन महिलाओं की पति की आयु लंबी तथा अच्छे स्वास्थ्य का वरदान मिलता हैं। वट पूर्णिमा कब है हमारे हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष यानी कि 29 जून 2026 को सुबह 6:12 से लेकर 30 जून को 4:25 तक रहेगा अब सबसे जरूरी है शभ मुहूर्त जो कि (सोमवार) को 29 जून से सुबह 8:50 से दोपहर को 1:45 तक बहुत ही शुभ योग है। वट पूर्णिमा पर भूलकर भी न खरीदें ये चीजें अक्सर महिलाएं व्रत की तैयारी में अनजाने में कुछ ऐसी चीज़ें खरीद लेती हैं, जिससे पूजा का फल नष्ट हो जाता है। वट पूर्णिमा के दिन सुहागिन स्त्रियों को इन चीज़ों को खरीदने से बचना चाहिए। काले या नीले रंग के वस्त्र और चूड़ियाँ:   देखिये वट पूर्णिमा सौभाग्य का पर्व है।...

निर्जला एकादशी व्रत कि कथा 2026: आखिर भीम के कारण क्यों पड़ा इसका नाम भीमसेनी एकादशी? जानिए यह पौराणिक कहानी

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 सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) कहा जाता है। यह साल की सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन यानि दूसरे दिन (द्वादशी) को सूर्योदय तक पानी की एक बूंद भी आप ग्रहण नहीं कर सकते। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति साल भर में किसी भी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता और यदि ओ सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा से रख ले, तो उसे पूरे साल की सभी एकादशियों का पुण्य फल एक साथ मिल जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पावन व्रत को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी क्यों कहा जाता है? पौराणिक निर्जला एकादशी व्रत कथा (Nirjala Ekadashi Vrat Katha in Hindi) पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास जी के पास जाकर अपनी व्यथा सुनाई। भीम ने कहा हे परम आदरणीय पितामह! मेरे परिवार के सभी लोग माता कुंती, भ्राता युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी हर एकादशी को भगवान विष्णु का व्रत रखते हैं और मुझे भी अन्न न खाने की सलाह देते हैं। परंतु मैं भगवान जनार्दन की भक्...

rath yatra 2026 Date: 15 या 16 जुलाई ? जगन्नाथ रथ यात्रा कब है, तिथि और समय

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दोस्तों इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को आयोजित की जएगी, इसका समय शाम को 9:12 मिनट से शुरू होगा, लेकिन शाम को रथ यात्रा  निकालना संभव नहीं है इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार अनुसार रथ यात्रा 17 जुलाई को ही निकलेगी, रथ यात्रा का इतिहास उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ प्रभु के मंदिर का इतिहास बेहद ही रोमांचक है इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी मे राजा इंद्रद्युम्न ने करवाया था, इसके पीछे बहुत ही अच्छी कथा है ,मैं आपको कहता हूं, पुरी के राजा इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे। एक बार उनके सपने में भगवान विष्णु आए और उन्होंने राजा से कहा कि समुद्र तट पर एक लकड़ी का लट्ठा जो कि मैं स्वयं हूं बहता हुआ आया है, उसे लड़के से मेरी मूर्ति बनाकर मेरा स्थापना करो ताकि मैं पूरी में निवास करूं। इस समय राजा ने समुद्र तट पर जाकर देखा तो वहां लकड़ी का लट्ठा था राजा ने उसे महल में लाकर मूर्ति बनाने का काम शुरू कर वाया, पर जो भी मूर्तिकार और बढ़ई  छैनी-हथौड़ी को उस लकड़ी पर चलते तो छैनी-हथौड़ी  टूट जाती थी। कोई भी उस लकड़ी को काट नहीं पा रहा था। तब देवताओं के शिल्पक...

भीमसेन एकादशी (निर्जला एकादशी) 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा-विधि

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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन साल भर में आने वाली सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना गया है। इसे भीमसेन एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष जून 2026 में भीमसेन एकादशी (निर्जला एकादशी) का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन बिना अन्न और बिना जल के भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। 1. निर्जला एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Tithi & Muhurat) साल 2026 में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय कुछ इस प्रकार है:   एकादशी तिथि का आरंभ:24 जून 2026 को शाम 06:13 बजे से  एकादशी तिथि की समाप्ति: 25 जून 2026 को शाम 08:10 बजे तक उदयातिथि के अनुसार व्रत की तारीख: 25 जून 2026, बुधवार (चूंकि सूर्योदय के समय एकादशी तिथि 25 जून को है, इसलिए मुख्य व्रत इसी दिन रखा जाएगा।) 2. क्यों कहा जाता है इसे भीमसेन एकाद...

जून 2026 में एकादशी कब है? जानें परमा और निर्जला एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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इस वर्ष जून 2026 में पहली एकादशी 11 जून को परमा एकादशी और दूसरी 25 जून को निर्मला एकादशी का व्रत रखा जाएगा हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भक्त पूरे साल एकादशी का इंतजार करते हैं। साल 2026 का जून का महीना धार्मिक दृष्टि से बहुत ही खास होने जा रहा है, क्योंकि इस महीने दो ऐसी बड़ी एकादशियां आ रही हैं जो आपके जीवन के सारे कष्ट दूर कर सकती हैं। आज के इस लेख में हम सीधे पॉइंट-टू-पॉइंट जानेंगे कि जून 2026 में परमा एकादशी और निर्जला एकादशी कब-कब हैं, उनके शुरू और समाप्त होने का सही समय क्या है, और इनका हमारे जीवन में क्या महत्व है। जून 2026 में एकादशी कब-कब है? (सटीक समय तालिका) दोस्तों, सबसे पहले आप इन दोनों एकादशि के शुरू और समाप्त होने का पंचांग समय नोट कर लीजिए ताकि आपसे कोई गलती न हो: एकादशी का नाम तिथि का आरंभ (शुरुआत) तिथि का समापन (अंत) व्रत की सही तारीख (उदया तिथि) ...

परमा एकादशी 2026: अधिक मास की सबसे बड़ी एकादशी 10 या 11 जून कब है? जानें सही तिथि, पारण का समय और शुभ मुहूर्त

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सनातन धर्म में एकादशी व्रत का महत्व सबसे ऊपर माना गया है, लेकिन जब बात 'परमा एकादशी' की हो, तो इसका महत्व अनंत गुना बढ़ जाता है। इसका कारण यह है कि यह एकादशी हर साल नहीं आती, बल्कि लगभग तीन साल में एक बार आने वाले 'अधिक मास' (मलमास या पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में आती है। साल 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास चल रहा है, और इस दुर्लभ महीने की परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करता है, उसकी वर्षों पुरानी दरिद्रता, आर्थिक तंगी और संकट दूर हो जाते हैं। परमा एकादशी 2026: तिथि और पंचांग  वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस दिन के मुख्य आंकड़े नीचे दिए गए हैं ताकि आपकी पूजा में कोई कमी न रहे: तारीख और दिन: 11 जून 2026, गुरुवार महीना और पक्ष: ज्येष्ठ अधिक मास, कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 जून 2026 को रात 12 बजकर 57 मिनट (12:57 AM) से। एकादशी तिथि समाप्त: 11 जून 2026 को रात 10 बजकर 36 मिनट (10:36 PM) तक। आज का नक्षत्र:    रेवती नक्षत्र सुबह 08:16 बजे तक रहेगा, इसके बाद अश्व...

एकादशी को क्या ना करें: वो काम जो एकादशी व्रत के दिन भूलकर भी नहीं करने चाहिए

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हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इसे 'व्रतों का राजा' कहा जाता है, क्योंकि साल में आने वाली 24 एकादशियों का व्रत करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी पापों का नाश होता है। अक्सर लोग एकादशी के दिन क्या करना चाहिए, इसके बारे में तो जानते हैं, लेकिन इस पावन तिथि पर किन कामों को करने से पूरी तरह बचना चाहिए, इस पर ध्यान नहीं देते। एकादशी व्रत केवल अन्न त्यागने का नाम नहीं है, बल्कि यह तन, मन और कर्म से पवित्र रहने का भी संकल्प है। आज के इस विस्तृत लेख में, हम उसी विषय पर गहराई से चर्चा करेंगे कि एकादशी के दिन आपको क्या 'नहीं' करना चाहिए, ताकि आपके व्रत का पूर्ण फल आपको मिल सके। महत्वपूर्ण सूचना: यहा दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और विद्वानों के मतों पर आधारित है।  एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए: मुख्य निषेध 1. अन्न और विशेषकर चावल का सेवन न करें यह सबसे प्रमुख नियम है। एकादशी के दिन किसी भी प्रकार का अनाज, जैसे कि गेहूँ, चावल, मक्का, दालें, आदि खाना वर्जित है। चावल क्यों नहीं? भगवान विष्णु के एक स्रूप, जिन्हें 'ऋषि...

आज का व्रत और त्योहार: 3 जून 2026 पंचांग, चंद्रोदय समय, शुभ मुहूर्त और विभुवन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

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जब जीवन में परेशानियां चारों तरफ से घेर लें और कोई रास्ता न सूझे, तो सनातन धर्म में एक ही नाम याद आता है—विघ्नहर्ता श्री गणेश। बप्पा अपने भक्तों के बड़े से बड़े संकट को भी पल भर में दूर कर देते हैं। आज, 3 जून 2026, बुधवार के दिन एक बहुत ही पवित्र संयोग बन रहा है, जिसे हम विभुवन संकष्टी चतुर्थी के रूप में मना रहे हैं। चूंकि यह ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आ रही है और दिन बुधवार का है,जो स्वयं गणेश जी का अपना दिन माना जाता है, इसलिए इस व्रत का महत्व और इससे मिलने वाला पुण्य फल कई गुना बढ़ गया है। आइए जानते हैं आज की पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और सबसे महत्वपूर्ण रात को चांद निकलने का सही समय। 3 जून 2026: विभुवन संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पंचांग वैदिक पंचांग के अनुसार, आज ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। बप्पा के भक्तों के लिए आज का पूरा दिन ही बेहद मंगलकारी है। आज का व्रत:   विभुवन संकष्टी चतुर्थी (3 जून 2026, बुधवार) अमृत काल (पूजा के लिए सबसे उत्तम):  शाम 07:37 से रात 09:24 तक। गोधूलि मुहूर्त:   शाम 07:14 से शाम 07:34 तक। सबसे बड़ा ...