आज का व्रत और त्योहार: 3 जून 2026 पंचांग, चंद्रोदय समय, शुभ मुहूर्त और विभुवन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
जब जीवन में परेशानियां चारों तरफ से घेर लें और कोई रास्ता न सूझे, तो सनातन धर्म में एक ही नाम याद आता है—विघ्नहर्ता श्री गणेश। बप्पा अपने भक्तों के बड़े से बड़े संकट को भी पल भर में दूर कर देते हैं। आज, 3 जून 2026, बुधवार के दिन एक बहुत ही पवित्र संयोग बन रहा है, जिसे हम विभुवन संकष्टी चतुर्थी के रूप में मना रहे हैं।
चूंकि यह ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आ रही है और दिन बुधवार का है,जो स्वयं गणेश जी का अपना दिन माना जाता है, इसलिए इस व्रत का महत्व और इससे मिलने वाला पुण्य फल कई गुना बढ़ गया है। आइए जानते हैं आज की पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और सबसे महत्वपूर्ण रात को चांद निकलने का सही समय।
3 जून 2026: विभुवन संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पंचांग
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। बप्पा के भक्तों के लिए आज का पूरा दिन ही बेहद मंगलकारी है।
आज का व्रत: विभुवन संकष्टी चतुर्थी (3 जून 2026, बुधवार)
अमृत काल (पूजा के लिए सबसे उत्तम): शाम 07:37 से रात 09:24 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:14 से शाम 07:34 तक।
सबसे बड़ा सवाल: आज रात चांद कब निकलेगा? (चंद्रोदय का सटीक समय)
संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने वाली माताओं, बहनों और भक्तों को जिस पल का सबसे बेसब्री से इंतजार रहता है, वह है चंद्र दर्शन का समय। शास्त्रों के अनुसार, जब तक रात को चंद्रमा को अर्घ्य न दे दिया जाए, यह व्रत पूरा नहीं माना जाता।
आज चंद्रोदय का समय: रात को 09 बजकर 59 मिनट (09:59 PM) पर चंद्रमा का उदय होगा।
(नोट: आप जिस शहर या क्षेत्र में रहते हैं, वहां के मौसम और भौगोलिक स्थिति के अनुसार इस समय में 5 से 10 मिनट का अंतर हो सकता है। इसलिए रात 9:50 से ही आसमान पर नज़र बनाए रखें।)
बप्पा को बेहद प्रिय हैं ये 5 चीजें, आज पूजा में जरूर करें शामिल
यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में हमेशा बरकत बनी रहे और तरक्की के रास्ते खुलें, तो आज गणेश जी की पूजा करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
1. 21 दूर्वा की महिमा: गणेश जी को 21 हरी दूर्वा (घास) की गांठें 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए चढ़ाएं। मान्यता है कि दूर्वा चढ़ाने से बप्पा जीवन की बड़ी से बड़ी चिंताओं को दूर कर देते हैं।
2. मोदक का मीठा भोग: बप्पा को मोदक या बूंदी के लड्डू सबसे ज्यादा प्रिय हैं। आज उन्हें इसका भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि और मिठास आती है।
3. लाल फूलों से श्रृंगार: लाल रंग ऊर्जा और शुभता का प्रतीक है। आज बप्पा को लाल गुड़हल या गुलाब का फूल अर्पित करने से आत्मविश्वास और सफलता में वृद्धि होती है।
4. चमत्कारी गणेश मंत्र: आज शांत मन से बैठकर ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप जरूर करें। इससे मानसिक तनाव कम होता है।
5. जरूरतमंदों की सेवा: चूंकि यह पुरुषोत्तम मास है, इसलिए आज अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, फल या जल का दान अवश्य करें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें?
ईश्वर की पूजा में नियमों से ज्यादा भक्त का 'भाव' महत्वपूर्ण होता है, फिर भी व्रत की पवित्रता बनाए रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
आज के दिन क्या करें:
- सुबह स्नान करके साफ और सात्विक वस्त्र (संभव हो तो हरे या पीले रंग के) पहनें।
- शाम की पूजा के समय गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा का पाठ करें।
- रात को 09:59 बजे तांबे या चांदी के लोटे में पानी, थोड़ा सा दूध और चंदन मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और फिर व्रत खोलें।
आज के दिन क्या भूलकर भी न करें:
- तुलसी का प्रयोग वर्जित: गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल न करें, यह शास्त्रों में मना है।
- क्रोध से बचें: व्रत के दिन अपने मन को शांत रखें। किसी पर गुस्सा न करें, न ही किसी का अपमान करें।
- तामसिक भोजन से दूरी: आज घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें। मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज से पूरी तरह दूर रहें।
दिल से एक आखिरी बात (निष्कर्ष)
विभुवन संकष्टी चतुर्थी सिर्फ एक उपवास नहीं है, बल्कि यह अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा सा समय निकालकर बप्पा के चरणों में बैठने और उनका आभार जताने का दिन है। आज पूरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ गणपति बप्पा के सामने सिर झुकाएं, आपके जीवन के सभी विघ्न निश्चित ही दूर होंगे। बोलिए, गणपति बप्पा मोरया!
अस्वीकरण (Disclaimer): यह जानकारी पारंपरिक पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न शहरों में बादलों या स्थानीय स्थिति के कारण चंद्रोदय के समय में थोड़ा बहुत अंतर देखना संभव है।

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