पीरियड के कितने दिन बाद पूजा कर सकते हैं? | क्या पीरियड में पूजा करना चाहिए? पूरी जानकारी

पीरियड के दौरान पूजा कर सकते हैं या नहीं, यह सवाल लगभग हर महिला के मन में आता है। खासकर जब एकादशी, सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत या कोई बड़ा त्योहार हो। आज हम शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार जानेंगे कि पीरियड में पूजा करने के क्या नियम हैं और कितने दिन बाद पूजा शुरू कर सकते हैं। हमारे हिंदू धर्म के अनुसार कोई भी महिला मासिक धर्म यानी पीरियड के दौरान चौथे दिन बाल धोकर व पूरी तरह से पवित्र होकर पूजा पाठ शुरू कर सकती हैं।



क्या पीरियड में पूजा कर सकते हैं?

हमारी माता और बहनों का पहला सवाल यही होता है कि अभी पीरियड चल रहे हैं, तो घर की पूजा कर सकते हैं या नहीं, तो जवाब है नहीं क्योंकि मासिक धर्म में आपको शररिक पूजा जैसे की मंदिर में पूजा पाठ या मूर्ति व पूजा की सामग्री को छुना बिल्कुल मना होता है। लेकिन आप मन से और सच्ची श्रद्धा से ईश्वर से प्रार्थना या फिर नाम जप तो कर ही सकती हैं। और हां जरूरी बात पीरियड के दौरान आपको आराम करने की सलाह दी  जाती हैं।
और हां ईश्वर भाव के भूखे होते हैं। इसलिए यदि सच्ची श्रद्धा और भक्ति हो तो मानसिक पूजा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

क्या पीरियड के चौथे दिन पूजा कर सकते है?

अब महिलाओं का दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह है की पीरियड के चौथे दिन पूजा कर सकते हैं, तो मेरा जवाब है, हा लेकिन साथ ही इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है पहले की पीरियड कंट्रोल हो गया हो और सबसे महत्वपूर्ण बात आपके बाल धोकर पूरी तरह शुद्ध होकर ही पूजा करनी है यही हमारे सनातन धर्म की नीति है।

परंपरागत रूप से माना जाता है कि पहले तीन दिन महिला को पूर्ण विश्राम करना चाहिए। चौथे दिन शुद्ध स्नान करने के बाद वह सामान्य धार्मिक कार्यों में भाग ले सकती है।
हालांकि कुछ परिवारों में यह नियम पांचवें दिन तक भी माना जाता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा का भी सम्मान करना चाहिए।

क्या पीरियड के 3 दिन पूजा कर सकते हैं?

जैसा कि हम जानते हैं पीरियड आना बिल्कुल नार्मल बात है, लेकिन हमारे शास्त्रों के अनुसार इन दिनों पूजा करना या मन्दिर में प्रवेश करना पुर्ण तह वर्जित माना गया है, देखिए मासिक धर्म एक चक्र है, जिसे पूर्ण करना होता हैं इसमें 2-3 दिन का समय लगता है, इसलिए हमारा जवाब है नहीं तीन दिन बाद भी आप पूजा नहीं कर सकती भले ही आपको ठीक ना लगे पर नियमों का पालन करना जरूरी है।
हालांकि आज के समय में अलग-अलग परिवारों की परंपराएं अलग हो सकती हैं। लेकिन पारंपरिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चौथे दिन शुद्ध स्नान के बाद ही पूजा शुरू करने की सलाह दी जाती है।

मासिक धर्म के दौरान स्त्री को क्या करना चाहिए?

देखिए धार्मिक हो या वैज्ञानिक दोनों के दृष्टिकोण से पीरियड शरीर में होने वाला एक चक्र है जो पूरा होगा ही इसे रोक नहीं जा सकता इस समय शरीर से विशुद्धिया बाहर निकलती हैं, इसलिए महिलाओं को पेट मे दर्द  ऐठन और थकान जैसी समस्या होती है, इसलिए 
  • पर्याप्त आराम करना चाहिए।
  • पौष्टिक भोजन लेना चाहिए।
  • अधिक पानी पीना चाहिए।
  • तनाव से दूर रहना चाहिए।
  • साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह समय शरीर के लिए संवेदनशील होता है। इसलिए आराम और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

व्रत के दन पीरियड आ जाए तो क्या करे?

मान लीजिए आज आपने व्रत रखा और 10:00 बजे तक सब सामान्य था पर दोपहर 12:00 या 2:00 या  शाम को 6:00 बजे आपको पीरियड आ जाते हैं तो ऐसे में आपको घबराना नहीं है और ना ही व्रत को छोड़ना है, आप अपने व्रत को जारी रखें पर आपको मानसिक पूजा करनी है इस दौरान आप मंदिर में प्रवेश न करें और ना ही पूजा के समान को हाथ लगे बस मन ही मन भगवान का भजन आदि करें और अपने व्रत को पूर्ण करें मतलब आपको व्रत के जो नियम है उनका पालन करना है लेकिन मंदिर में पूजा की सामग्री व  मूर्ति को हाथ नहीं लगाना है।

हालांकि आधुनिक समय में इस विषय पर अलग-अलग मत हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय मानते हैं।

एकादशी  के व्रत में पीरियड आ जाए तो क्या क्या  करें?

अगर एकादशी वाले दिन ही आपको पीरियड आ जाता है तब भी आपको व्रत के के नियम का पालन करना है और व्रत को पूर्ण करना है, इस दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रखना है, जैसे कि अन्य का पूर्ण त्याग करना और सिर्फ फलाहार करना है और मन ही मन व्रत का संकल्प करना है, इस दिन आप भले ही शरीर से पूजा ना कर सके पर मन से पूजा कर सकते हैं। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है।

क्या पीरियड में लड्डू गोपाल को छू सकते हैं?

देखिए हमारे सनातन धर्म और शास्त्रों मे भी साफ-साफ लिखा है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाएं अशुद्ध हो जाती हैं और किसी भी देवी देवता को छूना तथा मंदिर और रसोईघर में प्रवेश करना पुर्ण तह वर्जित होता है। इसलिए पीरियड  के दौरान आपक लड्डू गोपाल को नहीं छू  सकती लगे तो आप घर में अपने बच्चों पति या  किसी से बोल कर पूजा कर ने को कह सकती हैं 

क्या पीरियड में तुलसी को छू सकते हैं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक धर्म के दौरान तुलसी माता को स्पर्श नहीं करना चाहिए। और है तुलसी हमारे प्रभु जगन्नाथ को अति प्रिय हैं इस लिए तुलसी को अत्यंत पवित्र माना जाता है और पूजा में विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए इस दौरान तुलसी के पत्ते तोड़ने या तुलसी पूजन से बचना चाहिए।

क्या पीरियड में हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?

हा, मानसिक रूप से या बिना पूजा सामग्री के भी हनुमान चालीसा पढ़ी जा सकती है। बहुत से विद्वान मानते हैं कि भगवान का नाम लेने पर कोई रोक नहीं होती। इसलिए श्रद्धा के साथ आप हनुमान चालीसा का मानसिक पाठ कर सकते हैं।

क्या पीरियड में मंत्र जाप कर सकते हैं?

हा बिलकु कोई भी महिला मासिक धर्म के दौरान मानसिक रूप से मंत्र जाप कर सकती हैं, और इसमें कोई दिक्कत भी नहीं होती। अगर आप चाहे तो इन मंत्रों का जप भी कर सकते हैं,
  • ॐ नमः शिवाय
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • गायत्री मंत्र ( 
  • महामृत्युंजय मंत्र

क्या पीरियड में गीता पढ़ सकते हैं?

देखिए मासिक धर्म के दौरान आप किसी भी धार्मिक पुस्तक को हाथ नहीं लगा सकते इसलिए गीता पढ़ना संभव नहीं है पर आज के मॉडल युग की वजह से फोन के जरिए आप गीता पद या सुन सकते हो, आप गीता को अपने फोन के जरिए पढ़  या सुन सकते हो पर आपको ध्यान रखना है कि, आप धार्मिक ग्रंथो को हाथ ना लगे या पूजा की सामग्री को हाथ ना लगे। जबकि कुछ परंपराएं इससे बचने की सलाह देती हैं।

निष्कर्ष

पीरियड महिलाओं के जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। सनातन धर्म में मासिक धर्म के दौरान कुछ धार्मिक नियमों का पालन करने की परंपरा रही है। सामान्यतः पहले तीन दिनों तक पूजा-पाठ से दूर रहने और चौथे दिन स्नान करके पुनः पूजा शुरू करने की सलाह दी जाती है।
हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति हमेशा बनी रहनी चाहिए। चाहे शारीरिक पूजा संभव हो या न हो, मानसिक रूप से किया गया स्मरण और प्रार्थना भी उतनी ही प्रभावशाली मानी जाती है।

FAQ

FAQ 1. क्या पीरियड में मंदिर जा सकते हैं?
पारंपरिक हिंदू मान्यताओं के अनुसार मासिक धर्म के दौरान मंदिर में प्रवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग-अलग संप्रदायों और परिवारों में इस विषय पर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं।

FAQ 2. क्या पीरियड में शिवलिंग को जल चढ़ा सकते हैं?
सनातन परंपरा के अनुसार मासिक धर्म के दौरान शिवलिंग को स्पर्श करना या जल अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। इस समय मानसिक रूप से भगवान शिव का स्मरण किया जा सकता है।

FAQ 3. क्या पीरियड में व्रत रखा जा सकता है?
हाँ, यदि स्वास्थ्य ठीक हो तो व्रत रखा जा सकता है। लेकिन शरीर में कमजोरी या अधिक दर्द होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।

FAQ 4. क्या पीरियड में आरती कर सकते हैं?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार शारीरिक रूप से आरती करने से बचना चाहिए। हालांकि मन ही मन भगवान का स्मरण और प्रार्थना की जा सकती है।

FAQ 5. क्या पीरियड में पूजा घर में जाना चाहिए?
अधिकांश धार्मिक परंपराओं में मासिक धर्म के दौरान पूजा घर में प्रवेश न करने की सलाह दी जाती है। इसके बजाय मानसिक भक्ति करने को कहा जाता है।

FAQ 6. क्या पीरियड में भजन सुन सकते हैं?
हाँ, भजन सुनने, भगवान का नाम लेने और धार्मिक प्रवचन सुनने पर कोई रोक नहीं मानी जाती।

FAQ 7. क्या पीरियड में रामायण पढ़ सकते हैं?
कुछ परंपराएं धार्मिक ग्रंथों को स्पर्श करने से मना करती हैं, जबकि कई लोग मोबाइल या ऑडियो के माध्यम से रामायण सुनना उचित मानते हैं।

FAQ 8. क्या पीरियड में गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं?
हाँ, मानसिक रूप से गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है। कई विद्वान मानसिक जप को पूरी तरह स्वीकार करते हैं।

FAQ 9. क्या पीरियड में सत्यनारायण कथा सुन सकते हैं?
हाँ, कथा सुनने और भगवान का स्मरण करने पर सामान्यतः कोई रोक नहीं मानी जाती। हालांकि कथा पूजा में प्रत्यक्ष भाग लेने के नियम परिवार की परंपरा पर निर्भर करते हैं।

FAQ 10. क्या पीरियड में भगवान का नाम लेना चाहिए?
बिल्कुल। भगवान का स्मरण, नाम जप और प्रार्थना किसी भी समय की जा सकती है। भक्ति का संबंध मन और श्रद्धा से होता है।

FAQ 11. क्या पीरियड में करवा चौथ का व्रत रखा जा सकता है?
यदि स्वास्थ्य अनुमति दे तो व्रत रखा जा सकता है। लेकिन अत्यधिक कमजोरी या असुविधा होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहिए।

FAQ 12. क्या पीरियड में एकादशी का फलाहार कर सकते हैं?
हाँ, यदि आपने एकादशी व्रत रखा है तो फलाहार के नियमों का पालन कर सकते हैं और मानसिक रूप से भगवान विष्णु का स्मरण कर सकते हैं।

(ध्यान दे: विभिन्न परिवारों, परंपराओं और संप्रदायों में नियम अलग-अलग हो सकते हैं। यह जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है।)

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