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rath yatra 2026 Date: 15 या 16 जुलाई ? जगन्नाथ रथ यात्रा कब है, तिथि और समय

दोस्तों इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को आयोजित की जएगी, इसका समय शाम को 9:12 मिनट से शुरू होगा, लेकिन शाम को रथ यात्रा  निकालना संभव नहीं है इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार अनुसार रथ यात्रा 17 जुलाई को ही निकलेगी,



रथ यात्रा का इतिहास

उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ प्रभु के मंदिर का इतिहास बेहद ही रोमांचक है इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी मे राजा इंद्रद्युम्न ने करवाया था, इसके पीछे बहुत ही अच्छी कथा है ,मैं आपको कहता हूं, पुरी के राजा इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे। एक बार उनके सपने में भगवान विष्णु आए और उन्होंने राजा से कहा कि समुद्र तट पर एक लकड़ी का लट्ठा जो कि मैं स्वयं हूं बहता हुआ आया है, उसे लड़के से मेरी मूर्ति बनाकर मेरा स्थापना करो ताकि मैं पूरी में निवास करूं।
इस समय राजा ने समुद्र तट पर जाकर देखा तो वहां लकड़ी का लट्ठा था राजा ने उसे महल में लाकर मूर्ति बनाने का काम शुरू कर वाया, पर जो भी मूर्तिकार और बढ़ई  छैनी-हथौड़ी को उस लकड़ी पर चलते तो छैनी-हथौड़ी  टूट जाती थी। कोई भी उस लकड़ी को काट नहीं पा रहा था। तब देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा जी जी एक बूढ़े बढ़ई का रूप लेकर दरबार में पहुंचे उन्होंने कहा मैं मूर्ति बना दूंगा पर मेरी एक शर्त है की 21 दिनों तक मैं एक कमरे मे मूर्ति बनाऊंगा उस दौरान कोई भी कमरे में नहीं आयेगा, फिर विश्वकर्मा जी ने मूर्ति बनाना प्रारंभ किया 15 दिनों तक वह मूर्ति बनाते रहे और ठक ठक कि आवाज आती रही पर 16वे दिन से आवाज आनी बंद हो गई तो रानी को चिन्ता हुई और राजा से कहा की जाकर देखो कहीं वह वृद्ध बधाई भूख और प्यास से मर तो नहीं गया, इस पर राजा ने 16वे दिन कमरे का दरवाजा खोल दिया और विश्वकर्मा जी तुरंत वहां से अंतर ध्यान हो गए जब राजा ने सामने तो जगन्नाथ प्रभु, बलभद्र भैया और सुभद्रा दीदी की अधूरी मूर्तियां थी राजा चतित हुए पर इस समय आकाशवाणी हुई कि भगवान इसी रूप में यहां निवास करेंगे। तब से इसी अधूरे रूप में भगवान जगन्नाथ की पूजा होती आ रही है।

जगन्नाथ रथ यात्रा क्यों मनाई जाती है?

यहां बहुत ही रोचक कथा है मैं आपसे कहता हूं, एक बार की बात है, जगन्नाथ प्रभु की की बहन सुभद्रा जी ने प्रभु से पूरे नगर को देखने की इच्छा जताई तो प्रभु जगन्नाथ और बलभद्र भैया स्वयं रथ में बैठ कर उन्हें पूरा नगर घूमने के लिए ले गए इस दौरान भी अपनी मौसी गुंडिचा मंदिर के यहां 7 दिनों तक रुके, सच कहूं तो यह प्रभु जगन्नाथ की हि माया है। ताकि वे उन भक्तों को दर्शन दे सकें जो मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते।

कितने दिन चलती है यह पावन यात्रा?

भगवान जगन्नाथ की यात्रा पूरे 9 दिन तक चलती है। 

देखिए इस वर्ष 16 जुलाई 2026 को जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी से निकलेगी और अपने मुख्य मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर अपने मौसी के यहां जायेगी, इस दौरान जगन्नाथ महाप्रभु अपनी मौसी के घर 7 दिनों तक विश्राम करेंगे और दिन पूरे होने पर वापस पुरी के मंदिर में यानी 24 जुलाई को लौट आएंगे इस यात्रा के दौरान जो भक्त मंदिर में प्रवेश नहीं कर पता है वह दर्शन कर सकता है।

12 साल में क्यों बदली जाती है भगवान की मूर्तियां?

देखिए प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र भैया और सुभद्रा दीदी इन तीनों की मूर्तियां किसी धातु  या पत्थर की नहीं बनी है बल्कि वह नीम की लकड़ी की है, यही कारण है कि हर 12 साल में भगवान की मूर्तियां बदली जाती हैं।
भगवान की मूर्तियों को बदलते समय एक बेहद ही महत्वपूर्ण तरीके को अपनाया जाता है जो की आश्चर्य जनक है जब मूर्तियों को बदल जाता है तब पूरे शहर की बिजली गुल कर दी जाती है और  मंदिर के जो पुजारी जो मूर्ति की स्थापना करते हैं उनके आंखों पर पट्टी बांधी दी जाती हैं, ताकि वे लोग मूर्ति के उसे ब्रह्म पदार्थ को ना देख पाए, कहते हैं आज तक जिसने भी उसे बह्म पदार्थ को देखा है या देखने की कोशिश की है, वह जीवित नहीं बचा पर पुजारी का कहना है कि वह ब्रह्म पदार्थ किसी धड़कते हए दिल कि तरह महसूस होता है।

तीनों रथों के क्या नाम हैं?

  1. नंदिघोष (Nandighosa): यह भगवान जगन्नाथ का रथ है। इसका रंग लाल और पीला होता है। इसमें 16 पहिए होते हैं और इसकी ऊंचाई सबसे ज्यादा होती है।
  2. तालध्वज (Taladhwaja): यह बड़े भाई बलराम(बलभद्र) जी का रथ है। इसका रंग लाल और हरा होता है और इसमें 14 पहिए होते हैं।
  3. दर्पदलन या देवदलन (Darpadalana): यह बहन सुभद्रा का रथ है। इसका रंग लाल और काला होता है और इसमें 12 पहिए होते हैं।

घर पर कैसे करें भगवान जगन्नाथ की पूजा? (Ghar Par Puja Vidhi)

जो भक्त किसी कारणवश पुरी की रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पाते, वे आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन अपने घर के मंदिर में ही महाप्रभु का आशीर्वाद पा सकते हैं। आइये हम आपको घर पर पूजा करने की सरल विधि बताते हैं। 
  • घर की सफाई: रथ यात्रा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूरे घर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  • लकड़ी की चौकी सजाएं: पूजा घर में एक साफ लकड़ी की चौकी रखें। उस पर पीला या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • मूर्तियों की स्थापना: चौकी पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  • भोग और तुलसी दल: भगवान जगन्नाथ श्री कृष्ण के ही रूप हैं। उन्हें पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं। इस दिन महाप्रभु को मालपुआ, बूंदी के लड्डू और फलों का भोग लगाएं।
  • आरती और मंत्र: घी का दीपक जलाकर भगवान जगन्नाथ की आरती गाएं और मन ही मन "जय जगन्नाथ" या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs

1.जगन्नाथ मंदिर में किसे नहीं जाना चाहिए?

जवाब: पुरी के जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार पर लगे प्राचीन नियमों के अनुसार, गैर-सनातनियों (जो हिंदू धर्म से नहीं हैं) और विदेशी नागरिकों का मंदिर के अंदर प्रवेश वर्जित है। इतिहास में मंदिर पर हुए विदेशी आक्रमणों के कारण सुरक्षा के लिहाज से यह नियम बनाया गया था। हालांकि, रथ यात्रा के दौरान भगवान स्वयं बाहर आते हैं, इसलिए तब जाति या धर्म का कोई बंधन नहीं होता और हर कोई दर्शन कर सकता है।

2.भगवान जगन्नाथ की कितनी पत्नियां हैं?

जवाब: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ (श्री कृष्ण रूप) की मुख्य रूप से एक ही पत्नी हैं माता लक्ष्मी। रथ यात्रा के पांचवें दिन (हेरा पंचमी) माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से नाराज होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं क्योंकि भगवान उन्हें अपने साथ रथ यात्रा में नहीं ले जाते।

3.जगन्नाथ मंदिर में 22 सीढ़ियां क्यों हैं?

जवाब: पुरी मंदिर के मुख्य गर्भगृह तक पहुंचने के लिए भक्तों को 22 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिन्हें 'बायसी पहाचा' कहा जाता है। अध्यात्म में इन 22 सीढ़ियों को मनुष्य के 22 प्रकार के दोषों और पापों का प्रतीक माना गया है (जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, और अन्य मानसिक विकार)। मान्यता है कि इन सीढ़ियों पर कदम रखते ही भक्त के सारे मानसिक विकार दूर हो जाते हैं।

4.जगन्नाथपुरी कब जाना चाहिए?

जवाब: यदि आप रथ यात्रा के भव्य उत्सव और असीम भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं, तो आपको जून-जुलाई (आषाढ़ महीने) में जाना चाहिए। लेकिन यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं और उड़ीसा के सुहावने मौसम का आनंद लेना चाहते हैं, तो पुरी जाने का सबसे उत्तम समय अक्टूबर से मार्च के बीच का होता है।

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