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हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत किस तिथि को किया जाता है? सही उत्तर, नियम और संपूर्ण जानकारी

दि आप जानना चाहते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत किस तिथि को किया जाता है तो इसका सीधा और प्रामाणिक उत्तर है प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि (13वें दिन) को किया जाता है। हमारे हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष और इन दोनों ही पक्षों की त्रयोदशी को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए यह उपवास रखने का विधान है।

त्रयोदशी तिथि और प्रदोष व्रत की पंचांग गणना

पंचांग के गणित के अनुसार, चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर पूरे महीने को 30 दिनों में बांटा जाता है।  अमावस्या के के बाद जब चंद्रमा बड़ा होता है तो उसे शुक्ल पक्ष कहते हैं, और पूर्णिमा के बाद जब चंद्रमा छोटा होता है तो उसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। इन दोनों पक्षों के 13वें दिन को त्रयोदशी कहा जाता है।

और यह व्रत दोनों पक्षों में आता है, इसलिए एक साधारण हिंदू वर्ष (12 महीने) में कुल मिलाकर 24 प्रदोष व्रत होते हैं। परंतु जिस वर्ष पंचांग में अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) जुड़ता है, उस विशेष साल में दो व्रत बढ़ जाते हैं और कुल संख्या 26 हो जाती है। जैसा कि इस वर्ष 2026 में हुआ है ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्रत के दिन शाम के समय त्रयोदशी तिथि का होना अनिवार्य है, जिसे प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी कहा जाता है।

प्रदोष व्रत क्या है और इसका नामकरण कैसे हुआ?

संस्कृत भाषा में प्रदोष शब्द का अर्थ संध्या काल या दिन के ढलने का समय होता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार सूर्यास्त के ठीक 45 मिनट पहले से लेकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का जो कुल 1 घंटे 30 मिनट का समय होता है, उसे प्रदोष काल कहा जाता है।

पौराणिक मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि के दिन इसी विशिष्ट समय में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी स्तुति करते हैं। चूंकि इस व्रत की मुख्य पूजा, अभिषेक और व्रत कथा का श्रवण इसी संध्या समय (प्रदोष काल) में किया जाता है, इसलिए ऋषि-मुनियों ने इस उपवास का नाम प्रदोष व्रत रखा है।


दिनों के अनुसार प्रदोष व्रत के नाम और उनका अलग-अलग फल

पंचांग में प्रदोष व्रत जिस दिन पड़ता है उसके अनुसार उसका नाम और मिलने वाला फल बदल जाता है। यह सात प्रकार के होते हैं:

सोम प्रदोष व्रत (सोमवार): मानसिक शांति, तनाव से मुक्ति और अधूरी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए।

भौम प्रदोष व्रत (मंगलवार): कर्ज से मुक्ति (ऋण मुक्ति) और मंगल जनित दोषों को शांत करने के लिए।

 बुध प्रदोष व्रत (बुधवार): ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा में सफलता और व्यापार की रुकावटें दूर करने के लिए।

 गुरु प्रदोष व्रत (गुरुवार): शत्रुओं के नाश, भाग्य में वृद्धि और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए।

 शुक्र प्रदोष व्रत (शुक्रवार): भौतिक सुख-सुविधाएं, ऐश्वर्य, धन-दौलत और सौभाग्य बढ़ाने के लिए।

 शनि प्रदोष व्रत (शनिवार): संतान सुख की प्राप्ति, नौकरी की बाधाएं दूर करने और शनि दोष (साढ़ेसाती या ढैय्या) की शांति के लिए।

 रवि प्रदोष व्रत (रविवार): अच्छे स्वास्थ्य, गंभीर बीमारियों से मुक्ति और समाज में मान-सम्मान (यश) पाने के लिए।

जून 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब है?

साल 2026 के पंचांग के अनुसार जून के महीने में आने वाले प्रदोष व्रत की सही तारीखें इस प्रकार हैं:

 1. जून 2026 का पहला प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष): यह व्रत 12 जून 2026 दिन शुक्रवार को रखा जाएगा। शुक्रवार को होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत (भृगु प्रदोष) कहा जाएगा।

 2. जून 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष): यह व्रत 27 जून 2026 दिन शनिवार को पड़ेगा। शनिवार को होने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा जो संतान सुख के लिए विशेष है।

प्रदोष व्रत की सटीक पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा दो चरणों में पूरी होती है, जिसे आप इस प्रकार संपन्न कर सकते हैं:

सुबह का नियम: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। साफ वस्त्र पहनकर हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। सुबह शिवलिंग पर सामान्य जल और बेलपत्र अर्पित करें।

शाम की मुख्य पूजा (प्रदोष काल): सूर्यास्त से थोड़ी देर पहले दोबारा हाथ-मुंह धोकर या स्नान करके साफ कपड़े पहनें। और फिर शिवलिंग का पंचामृत यानि (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें।

 महादेव को सफेद चंदन, भस्म, अक्षत (साबुत चावल), बेलपत्र, धतूरा और मदार के फूल चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाकर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में शिव जी की आरती करें और सात्विक फल का भोग लगाएं।

बुध प्रदोष व्रत की प्रामाणिक पौराणिक कथा

स्कंद पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मणी अपने छोटे बेटे के साथ भीख मांगकर गुजारा करती थी। एक दिन लौटते समय उसे नदी किनारे एक घायल बालक मिला, जो विदर्भ देश का राजकुमार था, जिसके पिता का राज्य दुश्मनों ने छीन लिया था। ब्राह्मणी ने दयावश उसे अपने पास रख लिया।

कुछ समय बाद ऋषि शांडिल्य की आज्ञा से ब्राह्मणी और दोनों बालकों ने नियमपूर्वक त्रयोदशी तिथि का प्रदोष व्रत रखना शुरू किया। व्रत के प्रभाव से राजकुमार का विवाह एक गंधर्व कन्या 'अंशुमती' से हुआ। बाद में राजकुमार ने गंधर्व राज की सेना की मदद से अपने दुश्मनों को हराकर अपना राज्य वापस पा लिया। उसने ब्राह्मणी के बेटे को अपना प्रधानमंत्री बनाया। प्रदोष व्रत के पुण्य से ही उन दोनों परिवारों की दरिद्रता का हमेशा के लिए अंत हो गया।

खान-पान के नियम: क्या खाएं और क्या नहीं?

 क्या खा सकते हैं (फलाहार): व्रत के दौरान आप दूध, दही, चाय, मखाने, मूंगफली, साबूदाना और ताजे फल खा सकते हैं। शाम की पूजा के बाद सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है।

 क्या नहीं खा सकते (वर्जित): व्रत में गेहूं, चावल, जौ या किसी भी प्रकार का अनाज और दालें खाना पूरी तरह मना है। भोजन में सादे सफेद नमक का प्रयोग न करें। इसके अलावा, घर में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन बिल्कुल नहीं बनना चाहिए।

 प्रदोष व्रत से जुड़ी 5 बड़ी गलतफहमियां और सावधानियां 

अक्सर लोग इस व्रत में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिससे व्रत का फल नहीं मिलता। इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

 1. गलतफहमी: त्रयोदशी तिथि सुबह हो तो उसी दिन व्रत रखना चाहिए।

सच्चाई: यह गलत है। प्रदोष व्रत का सीधा संबंध शाम की पूजा से है। अगर त्रयोदशी तिथि सुबह है लेकिन शाम को सूर्यास्त से पहले समाप्त हो रही है, तो उस दिन व्रत नहीं रखा जाता। व्रत उसी दिन रखा जाएगा जब सूर्यास्त के समय त्रयोदशी तिथि लग रही हो।

 2. गलतफहमी: शिवलिंग की पूरी परिक्रमा करनी चाहिए।

 सच्चाई: शिव मंदिर में कभी भी शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। जहाँ से चढ़ा हुआ जल बाहर निकलता है (सोमसूत्र), उसे कभी लांघा नहीं जाता। हमेशा आधी परिक्रमा (चंद्राकार) करके वापस लौट आना चाहिए।

 3. गलतफहमी: शिव जी की पूजा में हल्दी और सिंदूर चढ़ाना शुभ है।

सच्चाई: शिवलिंग पर कभी भी हल्दी और सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता क्योंकि ये स्त्रियों से संबंधित वस्तुएं मानी जाती हैं और शिव जी वैरागी हैं। शिवलिंग पर हमेशा सफेद चंदन या भस्म ही चढ़ानी चाहिए। (माता पार्वती की मूर्ति पर आप सिंदूर चढ़ा सकते हैं)।

 4. गलतफहमी: व्रत के दिन बाल या नाखून काट सकते हैं।

सच्चाई: एकादशी और प्रदोष व्रत के दिन बाल काटना, दाढ़ी बनाना या नाखून काटना पूरी तरह वर्जित है। ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है।

 5. गलतफहमी: शाम की पूजा के बाद सादा नमक खा सकते हैं।

सच्चाई: प्रदोष व्रत में सादे नमक का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। अगर स्वास्थ्य ठीक न हो, तो केवल शाम के फलाहार में सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें, अन्यथा बिना नमक के व्रत रखना सबसे उत्तम है।

निष्कर्ष (Conclusion)

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को ही किया जाता है। यह व्रत केवल भूखे रहने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रदोष काल की सकारात्मक ऊर्जा से जुड़कर अपने मानसिक तनाव और दुखों को दूर करने का एक वैज्ञानिक व धार्मिक मार्ग है। यदि नियमों का सही पालन करते हुए पूर्ण सात्विकता के साथ यह उपवास रखा जाए, तो भगवान शिव अपने भक्तों के जीवन के सारे कष्टों का अंत अवश्य करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)

Q1. क्या कुंवारी कन्याएं प्रदोष व्रत रख सकती हैं?

A1:हाँ, कुंवारी कन्याएं मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए या विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए प्रदोष व्रत रख सकती हैं। उनके लिए सोम प्रदोष या गुरु प्रदोष रखना सबसे अच्छा माना जाता है।

Q2. यदि व्रत के दिन पीरियड (मासिक धर्म) आ जाए तो क्या करें?

A2:  यदि व्रत के दिन महिलाओं को पीरियड आ जाता है, तो उन्हें अपना उपवास (भूखा रहने का नियम) नहीं तोड़ना चाहिए। वे मानसिक रूप से मंत्रों का जाप कर सकती हैं। हालांकि, उन्हें पूजा सामग्री को छूना या मंदिर जाना वर्जित है; वे घर के किसी अन्य सदस्य से अपने नाम की पूजा करवा सकती हैं।

Q3. प्रदोष व्रत का उद्यापन कब और कैसे करना चाहिए?

A3: इस व्रत को कम से कम 11 या 26 त्रयोदशी तक लगातार रखने के बाद इसका उद्यापन किया जाता है। उद्यापन हमेशा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ही करना चाहिए, जिसमें दो ब्राह्मणों को बुलाकर हवन कराया जाता है और शिव-पार्वती की कपूर से आरती करके व्रत पूर्ण माना जाता है।

Q4. क्या प्रदोष व्रत में दो बार फलाहार कर सकते हैं?

A4:  शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत में दिनभर निराहार या केवल जलाहार (पानी) पर रहना चाहिए और शाम की मुख्य पूजा के बाद ही एक बार फलाहार ग्रहण करना चाहिए। बार-बार खाने से व्रत की सात्विकता कम होती है।

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