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एकादशी को क्या ना करें: वो काम जो एकादशी व्रत के दिन भूलकर भी नहीं करने चाहिए

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इसे 'व्रतों का राजा' कहा जाता है, क्योंकि साल में आने वाली 24 एकादशियों का व्रत करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी पापों का नाश होता है। अक्सर लोग एकादशी के दिन क्या करना चाहिए, इसके बारे में तो जानते हैं, लेकिन इस पावन तिथि पर किन कामों को करने से पूरी तरह बचना चाहिए, इस पर ध्यान नहीं देते।


एकादशी व्रत केवल अन्न त्यागने का नाम नहीं है, बल्कि यह तन, मन और कर्म से पवित्र रहने का भी संकल्प है। आज के इस विस्तृत लेख में, हम उसी विषय पर गहराई से चर्चा करेंगे कि एकादशी के दिन आपको क्या 'नहीं' करना चाहिए, ताकि आपके व्रत का पूर्ण फल आपको मिल सके।

महत्वपूर्ण सूचना: यहा दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और विद्वानों के मतों पर आधारित है। 

एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए: मुख्य निषेध

1. अन्न और विशेषकर चावल का सेवन न करें

यह सबसे प्रमुख नियम है। एकादशी के दिन किसी भी प्रकार का अनाज, जैसे कि गेहूँ, चावल, मक्का, दालें, आदि खाना वर्जित है।

चावल क्यों नहीं? भगवान विष्णु के एक स्रूप, जिन्हें 'ऋषि वेदव्यास' कहा जाता है, ने जब वेदों को विभाजित किया था, तब एकादशी के दिन अन्न की निंदा की थी। इस के पीछे एक वैज्ञानिक और पौराणिक कारण भी है। चंद्रमा का पृथ्वी पर विशेष प्रभाव होता है, जो जल को प्रभावित करता है। चावल में जल की मात्रा बहुत अधिक होती है, और इसे खाने से मन पर चंद्रमा का प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे चंचलता और अशांति पैदा हो सकती है, जो व्रत के उद्देश्य के विरुद्ध है। पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि इस दिन चावल खाने से अगले जन्म में कीड़े का रूप मिलता है।

2. मास-मछली, तामसिक भोजन और शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित है

एकादशी एक अत्यंत पवित्र दिन है। इस दिन किसी भी रूप में मांस, मछली, अंडे, या तामसिक भोजन (जैसे लहसुन, प्याज, अधिक मसालेदार भोजन) का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब, धूम्रपान या किसी भी प्रकार का नशा पूरी तरह वर्जित है। यह तन और मन को अपवित्र बनाता है।

3. ब्रह्मचर्य का पालन करें

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन पति-पत्नी को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता और इसे धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना गया है।

4. झूठ न बोलें, चोरी न करें और परनिंदा न करें

एकादशी का व्रत केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक भी है।

 झूठ बोलना: झूठ बोलने से व्यक्ति के पाप बढ़ते हैं और व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है।

 चोरी करना: किसी भी प्रकार की चोरी महापाप है, और एकादशी के दिन ऐसा करना और भी गंभीर अपराध है।

 परनिंदा (दूसरों की बुराई करना): किसी की पीठ पीछे बुराई करना या किसी को अपशब्द कहना भगवान विष्णु को अप्रिय है। इस दिन मन को पूरी तरह से भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए।

5. दिन में सोने से बचें (दिवास्वाप)

एकादशी के दिन सुबह से लेकर रात तक भगवान का नाम जपते रहना चाहिए। दिन में सोने से व्रत के प्रति व्यक्ति की गंभीरता कम होती है। इसलिए, बीमार, वृद्ध या बच्चों को छोड़कर, बाकी लोगों को दिन में सोने से बचना चाहिए।

6. विशिष्ट वस्तुओं की खरीदारी न करें

एकादशी के दिन कुछ वस्तुओं को खरीदना धार्मिक दृष्टि से वर्जित माना गया है, जैसे:

  • लोहा या लोहे से बनी वस्तुएं
  • चमड़े का सामान
  • नमक
  • अन्न (विशेषकर चावल)
  • कुछ लोग इस दिन कपड़े खरीदना भी अशुभ मानते हैं।

7. हजामत (बाल कटवाना) और नाखून न काटें

शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी और कुछ अन्य विशिष्ट तिथियों पर हजामत करवाना, दाढ़ी बनवाना या नाखून काटना अनुचित है। यह सौभाग्य में कमी लाता है।

8. दातुन (दंतधावन) का प्रयोग न करें

यह एक कम ज्ञात नियम है, लेकिन प्राचीन परंपराओं में, एकादशी के दिन लकड़ी से बनी दातुन का प्रयोग करना वर्जित है। इसके बजाय, आप केवल पानी से कुल्ला कर सकते हैं या अन्य पवित्र सामग्री का उपयोग कर सकते हैं।

9. जुआ न खेलें और किसी का अपमान न करें

जुआ खेलना एक बुरी आदत है और एकादशी के दिन इसे करना पाप है। किसी को ठेस पहुंचाना या किसी का अपमान करना, चाहे वह इंसान हो या जानवर, भगवान विष्णु के प्रति अपराध है।

10. दान करते समय लालच न करें

एकादशी के दिन दान करने का बहुत बड़ा महत्व है। लेकिन दान करते समय आपके मन में कोई लालच या दिखावा नहीं होना चाहिए। आपको अपनी सामर्थ्य के अनुसार, बिना किसी अपेक्षा के, भगवान की प्रसन्नता के लिए दान करना चाहिए।

एकादशी के दिन क्या करें?

निषेधों को जानने के बाद, यह जानना भी जरूरी है कि एकादशी के दिन क्या करना चाहिए:

भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करें। उन्हें पीले फूल, फल, और मिठाई अर्पित करें

नाम जप: दिन भर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या भगवान विष्णु के अन्य पवित्र नामों का जप करें।

कथा श्रवण: एकादशी की व्रत कथा जरूर सुनें या पढ़ें।

जागरण: संभव हो तो रात में जागकर भगवान के भजनों का कीर्तन करें।

दान-पुण्य: अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।

भक्ति और समर्पण: अपने मन को पूरी तरह से भगवान के चरणों में समर्पित कर दें।

निष्कर्ष

एकादशी तिथि हमारे जीवन में भक्ति और शुद्धि का एक अद्भुत अवसर लेकर आती है। ऊपर बताए गए निषेधों का पालन करके और भक्ति भाव से भगवान विष्णु की आराधना करके, आप इस पावन तिथि का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं। याद रखें, नियमों का पालन करना जितना जरूरी है, उससे भी ज्यादा जरूरी है आपके मन की पवित्रता और भगवान के प्रति आपका समर्पण। हम आशा करते हैं कि यह विस्तृत लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

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