जून 2026 में एकादशी कब है? जानें परमा और निर्जला एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
इस वर्ष जून 2026 में पहली एकादशी 11 जून को परमा एकादशी और दूसरी 25 जून को निर्मला एकादशी का व्रत रखा जाएगा हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भक्त पूरे साल एकादशी का इंतजार करते हैं। साल 2026 का जून का महीना धार्मिक दृष्टि से बहुत ही खास होने जा रहा है, क्योंकि इस महीने दो ऐसी बड़ी एकादशियां आ रही हैं जो आपके जीवन के सारे कष्ट दूर कर सकती हैं।
आज के इस लेख में हम सीधे पॉइंट-टू-पॉइंट जानेंगे कि जून 2026 में परमा एकादशी और निर्जला एकादशी कब-कब हैं, उनके शुरू और समाप्त होने का सही समय क्या है, और इनका हमारे जीवन में क्या महत्व है।
जून 2026 में एकादशी कब-कब है? (सटीक समय तालिका)
दोस्तों, सबसे पहले आप इन दोनों एकादशि के शुरू और समाप्त होने का पंचांग समय नोट कर लीजिए ताकि आपसे कोई गलती न हो:
| एकादशी का नाम | तिथि का आरंभ (शुरुआत) | तिथि का समापन (अंत) | व्रत की सही तारीख (उदया तिथि) |
|---|---|---|---|
| परमा एकादशी | 10 जून, मध्यरात्रि 12:58 बजे | 11 जून, रात 10:37 बजे | 11 जून 2026 (गुरुवार) |
| निर्जला एकादशी | 24 जून, शाम 06:13 बजे | 25 जून, शाम 08:10 बजे | 25 जून 2026 (गुरुवार) |
1. परमा एकादशी 2026 कब है और इसका क्या महत्व है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, परमा एकादशी का आरंभ 10 जून बुधवार को रात 12 बजकर 58 मिनट पर हो जाएगा। और इसका समापन 11 जून को रात में 10 बजकर 37 मिनट पर होगा। यानि कि हम कह सकते है, परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
परमा एकादशी का महत्व:
दोस्तों, आमतौर पर साल में 24 एकादशियां होती हैं। हर महीने दो एकादशी आती हैं, एक कृष्ण पक्ष की और दूसरी शुक्ल पक्ष की। लेकिन साल 2026 में ज्येष्ठ का 'अधिक मास' (मलमास या पुरुषोत्तम मास) लग रहा है, जिसकी वजह से इस साल एकादशियों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो गई है।
इन्हीं दो अतिरिक्त एकादशियों में से एक है, परमा एकादशी। विष्णु पुराण में इसका बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अधिक मास की इस दुर्लभ परमा एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा से रखता है, उसे 100 यज्ञ करने के बराबर पुण्य फल मिलता है और घर की पुरानी दरिद्रता दूर होती है।
2. निर्जला एकादशी 2026 कब है और क्यों है यह इतनी खास?
वैदिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून को शाम 6 बजकर 13 मिनट पर होगा, और इसका समापन 25 जून गुरुवार को शाम 8 बजकर 10 मिनट पर होगा। उदया तिथि के हिसाब से 25 जून 2026, गुरुवार को ही निर्जला एकादशी का व्रत करना सबसे उत्तम और फलदायी रहेगा।
निर्जला एकादशी का महत्व:
शास्त्रों में निर्जला एकादशी को साल की सबसे कठिन और सबसे बड़ी एकादशी माना गया है। इस व्रत में सुबह से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती (यानी बिना जल के व्रत रखा जाता है)।
इसे 'भीमसेन एकादशी' भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में भीमसेन अपनी भूख को काबू नहीं कर पाते थे, इसलिए उन्होंने अपने पूरे जीवन में सिर्फ यही एक निर्जला एकादशी का व्रत किया था। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति साल भर की बाकी एकादशियां नहीं रख पाता, वह अगर सिर्फ इस एक निर्जला एकादशी का व्रत नियम से रख ले, तो उसे साल की सभी 24 एकादशियों के व्रत का पूरा पुण्य एक साथ मिल जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों, जून 2026 का यह महीना भगवान श्री हरि विष्णु की भक्ति के लिए एक वरदान की तरह है। एक तरफ जहाँ 3 साल में एक बार आने वाली परमा एकादशी है, वहीं दूसरी तरफ सभी व्रतों की राजा निर्जला एकादशी है। आप भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार इन व्रतों का पालन करें और दान-पुण्य जरूर करें।

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