ganga dashara ko kya karna chahiye(गंगा दशहरा को क्या करना चाहिए)? पूजा विधि और 10 महादान
Ganga Dussehra Ke Niyam: सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी गंगा दशहरा का दिन बेहद पवित्र और चमत्कारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस विशेष दिन किए गए कार्यों का फल हजार गुना ज़्यादा मिलता है, क्योंकि इस बार ज्येष्ठ अधिक मास (मलमास) का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।
अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि इस पवित्र दिन पर घर पर रहकर क्या करना चाहिए जिससे माँ गंगा की असीम कृपा मिल सके। आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार गंगा दशहरा को क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।
गंगा दशहरा को क्या करना चाहिए?
1. घर पर ही करें महास्नान
यदि आप गंगा नदी के तट (जैसे हरिद्वार या वाराणसी) पर स्नान करने नहीं जा पा रहे हैं, तो निराश न हों। सुबह जल्दी उठकर अपने घर के नहाने के सामान्य पानी में थोड़ा सा गंगाजल और एक चम्मच कच्चा दूध मिला लें। नहाते समय माँ गंगा का ध्यान करते हुए इस पवित्र मंत्र का जाप करें:
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥’
2. 10 की संख्या का विशेष नियम अपनाएं
गंगा दशहरा की पूजा में '10' की संख्या का सबसे बड़ा महत्व माना गया है। इसलिए पूजा करते समय माँ गंगा और भगवान विष्णु के सामने 10 दीपक जलाएं, उन्हें 10 प्रकार के ऋतु फल (जैसे आम, खरबूजा, तरबूज) का भोग लगाएं, और पूजा में 10 अलग-अलग प्रकार के फूल अर्पित करें।
3. पितृ दोष मुक्ति के लिए 10 महादान करें
इस पवित्र दिन दान करने से कुंडली के बड़े से बड़े ग्रह दोष और पितृ दोष शांत होते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार इन 10 चीजों का दान किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को अवश्य करें:
- पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (मटका या कलश)
- सत्तू और गुड़
- खरबूजा, तरबूज या आम (ऋतु फल)
- काले तिल और शुद्ध घी
- सूती वस्त्र (धोती या साड़ी)
- हाथ से झलने वाला बांस का पंखा
- छाता या सूती रूमाल
- चने की दाल
- खड़ाऊँ या चप्पल
- सामर्थ्य अनुसार नकद दक्षिणा या अन्न
4. मंत्र जाप और दीपदान करें
इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और तुलसी जी के पास दीपदान (दीपक जलाना) अवश्य करें। साथ ही, तुलसी या चंदन की माला से 108 बार "ॐ गंगायै नमः" मंत्र का जाप करें या गंगा स्तोत्र का पाठ करें।
गंगा दशहरा के दिन क्या भूलकर भी न करें?
- जल स्रोतों को गंदा न करें: इस पवित्र दिन पर किसी भी नदी, तालाब या कुएं के पास गंदगी न फैलाएं और न ही वहाँ साबुन लगाकर नहाएं। ऐसा करने से पुण्य की जगह महापाप लगता है।
- तामसिक भोजन से दूर रहें: घर में पूरी सात्विकता बनाए रखें। लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा जैसे तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें।
- क्रोध और अपमान से बचें: किसी भी गरीब, असहाय व्यक्ति, सुहागिन महिला या बुजुर्ग का अपमान न करें और न ही किसी पर क्रोध करें।
गंगा दशहरा शॉर्ट पूजा विधि (Ganga Dussehra Puja Vidhi)
- स्नान: सुबह पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं।
- वस्त्र: साफ़ पीले या सफेद कपड़े पहनें।
- अर्घ्य: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं।
- स्थापना: मंदिर में विष्णु जी और शिव जी की मूर्ति रखें।
- तिलक: भगवान को रोली, चंदन और अक्षत लगाएं।
- भोग: आम, खरबूजा या मिठाई का भोग लगाएं।
- आरती: घी का दीपक जलाकर आरती करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
मई के महीने में आने वाला गंगा दशहरा जीवन में सुख-समृद्धि, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा लाने का महा-अवसर है। यदि आप इस दिन पवित्रता का ध्यान रखते हैं, सात्विक रहते हैं और ज़रूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देते हैं, तो माँ गंगा की कृपा से आपके परिवार में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
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FAQ
Q 1. यह गंगा दशहरा क्यों मनाया जाता है और इसका नाम दशहरा क्यों पड़ा?
A1: बहुत से लोग कंफ्यूज रहते हैं कि दशहरा तो दिवाली से पहले आता है, फिर यह क्या है? असल में ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ही माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं। इस दिन को गंगा दशहरा इसलिए कहते हैं क्योंकि दशहरा का मतलब होता है दस पापों को हरने वाला। मान्यता है कि इस खास दिन गंगा जी में डुबकी लगाने या उनकी पूजा करने से इंसान के 10 तरह के बड़े पाप (कायिक, वाचिक और मानसिक) पूरी तरह धुल जाते हैं।
Q 2. गंगा दशहरा के दिन पूजा का सबसे खास नियम क्या है, किस संख्या का महत्व होता है?
A2: गंगा दशहरा पर 10 की संख्या का सबसे बड़ा खेल है। इस दिन आप जो भी पूजा, भोग या दान करें कोशिश करें कि उसकी गिनती 10 हो। जैसे गंगा जी की पूजा करते समय 10 दीपक जलाएं, 10 तरह के फल चढ़ाएं, 10 तरह के फूल और 10 तरह के नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और इसी नियम से भगवान शिव और माँ गंगा की आराधना करें।
Q 3. अगर कोई इंसान गंगा नदी तक नहीं जा सकता, तो वह घर बैठे गंगा दशहरा का पूरा पुण्य कैसे पाए?
A3: हर कोई तो हर साल गंगा जी नहीं जा सकता। इसके लिए शास्त्रों में बड़ा सीधा उपाय बताया गया है। इस दिन सुबह अपने घर के नहाने वाले सादे पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें। नहाते समय मन ही मन माँ गंगा का ध्यान करें और ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः मंत्र का जाप करें। घर के मंदिर में ही माँ गंगा या शिव जी की मूर्ति के सामने दीया जलाकर 10 मालपुए या फल का भोग लगा दें, गंगा मैया घर बैठे ही बेड़ा पार कर देंगी।
Q 4. इस दिन कौन सी चीजो का दान करना सबसे उत्तम माना गया है?
A4: चूंकि गंगा दशहरा भी जेठ (ज्येष्ठ) के कड़े महीने में आता है, इसलिए इस दिन गर्मी से राहत देने वाली चीजों का दान सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। इस दिन 10 की संख्या में पानी से भरे मिट्टी के घड़े (कलश), खरबूजे, आम, पंखे, छाते, चप्पल या सत्तू का दान करना सबसे बेस्ट रहता है। भूखे और प्यासे लोगों को मीठा शरबत पिलाना भी इस दिन महादान कहलाता है।
Q 5. क्या गंगा दशहरा और गंगा जयंती दोनों एक ही त्योहार हैं या इनमें कोई अंतर है?
A5: देखो इसमें बहुत बड़ा अंतर है और लोग अक्सर यहा मात खा जाते हैं। गंगा जयंती (जो वैशाख शुक्ल सप्तमी को आती है) वह दिन है जब गंगा जी भगवान शिव की जटाओं में समाई थीं, यानी एक तरह से उनका पुनर्जन्म हुआ था। और गंगा दशहरा (जो ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को आता है) वह ऐतिहासिक दिन है जब मा गंगा शिव जी की जटाओं से निकलकर धरती पर भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार करने उतरी थीं। इसलिए दोनों अलग-अलग त्योहार हैं।
यह लेख केवल पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में वर्णित नियमों पर आधारित है। किसी भी विशेष दान, व्रत या संकल्प से पहले अपने स्थानीय पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

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