सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आज क्या है 30 मई 2026: ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा व्रत, त्यौहार, भद्रा काल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

30 मई 2026, शनिवार के दिन अधिक मास पूर्णिमा व्रत का पावन संयोग बन रहा है। आज के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं आज का बिल्कुल शुद्ध पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और भद्रा का समय।

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय का समय

सूर्योदय: सुबह 05:24 AM

सूर्यास्त: शाम 07:13 PM

चंद्रोदय (पूर्णिमा का चांद): शाम 06:35 PM

चंद्रास्त: अगले दिन की सुबह 04:55 AM (31 मई)

आज का मुख्य पंचांग (Panchang Details)

तिथि: शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि दोपहर 11:57 AM तक है, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए पूर्णिमा का व्रत और अर्घ्य आज ही दिया जाएगा।

नक्षत्र: विशाखा नक्षत्र दोपहर 01:20 PM तक रहेगा, जिसके बाद अनुराधा नक्षत्र लग जाएगा।

योग: शिव योग पूरे दिन और पूरी रात (पूर्ण रात्रि तक) रहेगा, जो बेहद शुभ है।

करण: वणिज करण दोपहर 11:57 AM तक, उसके बाद विष्टि करण (भद्रा) शुरू होगी।

वार: शनिवार (Saturday)

पक्ष: शुक्ल पक्ष (अधिक मास)

हिंदू मास एवं संवत

विक्रम संवत: 2083 सिद्धार्थी

शक संवत: 1948 पराभव

गुजराती संवत: 2082 पिंगल

चन्द्रमास: ज्येष्ठ (अधिक) - अमान्त और पूर्णिमान्त।

राशि तथा नक्षत्र गोचर (Grah Gochar)

चन्द्र राशि: चन्द्रमा सुबह 06:39 AM तक तुला राशि में थे, इसके बाद पूरे दिन वृश्चिक राशि में संचार करेंगे।

सूर्य राशि: सूर्य देव वृषभ राशि (रोहिणी नक्षत्र, पद 3) में स्थित हैं।

नक्षत्र पद: विशाखा नक्षत्र पद 3 सुबह 06:39 AM तक, इसके बाद पद 4 दोपहर 01:20 PM तक रहेगा। फिर अनुराधा नक्षत्र पद 1 रात 08:02 PM तक रहेगा।

आज के शुभ मुहूर्त (Today's Shubh Muhurat)

अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ): सुबह 11:51 AM से दोपहर 12:46 PM तक।

रवि योग: सुबह 05:24 AM से दोपहर 01:20 PM तक रहेगा।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:03 AM से 04:43 AM तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:37 PM से दोपहर 03:32 PM तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:12 PM से शाम 07:33 PM तक।

आनन्दादि एवं तमिल योग: दोपहर 01:20 PM तक शुभ और सिद्ध योग है, उसके बाद अमृत योग का महासंयोग बनेगा।

आज का अशुभ समय: भद्रा और विंछुड़ो (Ashubh Samay)

शनिवार के दिन कुछ विशेष अशुभ योग बन रहे हैं, जिनमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं:

राहुकाल: सुबह 08:51 AM से सुबह 10:35 AM तक रहेगा। इस समय कोई भी नया काम या पैसों का लेन-देन न करें।

भद्रा काल (विष्टि): दोपहर 11:57 AM से शुरू होकर अगले दिन (31 मई) सुबह 01:05 AM तक भद्रा रहेगी। भद्रा का 

यमगंड काल: दोपहर 02:02 PM से शाम 03:46 PM तक।

दिशा शूल और अग्निवास

दिशा शूल: शनिवार को पूर्व (East) दिशा में दिशा शूल रहता है। आज पूर्व दिशा की यात्रा से बचें।

अधिक मास पूर्णिमा के दिन क्या करें?

आज शनिवार और अधिक मास की पूर्णिमा का योग है। दोपहर 11:57 बजे के बाद जब पूर्णिमा तिथि लग जाए, तो भगवान सत्यनारायण की कथा करें। शाम को चंद्रोदय (06:35 PM) के बाद कच्चे दूध में जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। चूंकि आज शनिवार है, इसलिए पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाने से शनि दोष और पितृ दोष दोनों शांत होते हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Adhik Maas Daan List 2026: अधिक मास में इन चीजों का दान चमका देगा आपकी सोई हुई किस्मत

Adhik Maas 2026 Daan List: हिंदू धर्म में अधिक मास का बहुत अधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इस साल 2026 में अधिक मास 17 मई 2026 दिन रविवार से शुरू होकर 15 जून 2026 दिन सोमवार तक रहने वाला है। इस पूरे महीने को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो पूरी तरह से भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस पवित्र महीने में किए गए दान, पुण्य और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में 10 गुना से लेकर करोड़ों गुना अधिक मिलता है। अगर आप भी इस महीने में भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहते हैं, तो अपनी योग्यता के अनुसार कुछ विशेष चीजों का दान जरूर करें। आइए जानते हैं कि अधिक मास में किन चीजों का दान सबसे उत्तम माना गया है।   अधिक मास में दान का धार्मिक महत्व क्या है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास को पहले 'मलमास' या उपेक्षित महीना माना जाता था, क्योंकि इसका कोई स्वामी ग्रह नहीं था। तब भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया और वरदान दिया कि जो भी इस महीने में निष्काम भाव से दान-पुण्य या दीपदान करेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर ...

पीरियड के कितने दिन बाद पूजा कर सकते हैं? | क्या पीरियड में पूजा करना चाहिए? पूरी जानकारी

पीरियड के दौरान पूजा कर सकते हैं या नहीं, यह सवाल लगभग हर महिला के मन में आता है। खासकर जब एकादशी, सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत या कोई बड़ा त्योहार हो। आज हम शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार जानेंगे कि पीरियड में पूजा करने के क्या नियम हैं और कितने दिन बाद पूजा शुरू कर सकते हैं। हमारे हिंदू धर्म के अनुसार कोई भी महिला मासिक धर्म यानी पीरियड के दौरान चौथे दिन बाल धोकर व पूरी तरह से पवित्र होकर पूजा पाठ शुरू कर सकती हैं। क्या पीरियड में पूजा कर सकते हैं? हमारी माता और बहनों का पहला सवाल यही होता है कि अभी पीरियड चल रहे हैं, तो घर की पूजा कर सकते हैं या नहीं, तो जवाब है नहीं क्योंकि मासिक धर्म में आपको शररिक पूजा जैसे की मंदिर में पूजा पाठ या मूर्ति व पूजा की सामग्री को छुना बिल्कुल मना होता है। लेकिन आप मन से और सच्ची श्रद्धा से ईश्वर से प्रार्थना या फिर नाम जप तो कर ही सकती हैं। और हां जरूरी बात पीरियड के दौरान आपको आराम करने की सलाह दी  जाती हैं। और हां ईश्वर भाव के भूखे होते हैं। इसलिए यदि सच्ची श्रद्धा और भक्ति हो तो मानसिक पूजा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्या पीरियड के चौथ...

वट सावित्री व्रत 2026: 16 मई को है व्रत, जानें पूजा का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त, सामग्री लिस्ट और विधि

Vat Savitri Vrat 2026  हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का बहुत बड़ा और पवित्र महत्व है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं। इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में वट सावित्री व्रत की सही तारीख, पूजा का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि विधान। वट सावित्री व्रत 2026 की सही तिथि  पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम हो सकता है, लेकिन उदयातिथि के नियमों के अनुसार व्रत 16 मई 2026, शनिवार को ही रखा जाएगा। अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 16 मई 2026 को सुबह 05:11 मिनिट से। अमावस्या तिथि का समापन: 16 मई 2026 को ही देर रात 01:30 मिनिट तक। पूजा के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त 16 मई को वट वृक्ष की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, लेकिन सबसे उत्तम समय हम आप को बताएंगे जो इस प्रकार है। प्रातः काल का उत्तम मुहूर्त: सुबह 07:12 बजे से सुबह 08:24 बजे तक। अ...