अधिक मास 2026 में क्या करें और क्या न करें? जानें मलमास के नियम, महत्व और अचूक उपाय

हिंदू कैलेंडर में 'अधिक मास' का एक बहुत ही विशेष और पवित्र स्थान है। इसे आम बोलचाल की भाषा में 'मलमास' और धार्मिक दृष्टि से 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह महीना भगवान श्री हरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा, दान और भक्ति का फल बाकी दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा मिलता है।



साल 2026 में ज्येष्ठ का महीना अधिक मास के रूप में मनाया जा रहा है। ऐसे में हर सनातनी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि इस दुर्लभ और पवित्र समय का पूरा लाभ कैसे उठाया जाए? आज के इस लेख में हम बहुत ही सरल शब्दों में जानेंगे कि अधिक मास में हमें कौन से काम करने चाहिए और किन कामों से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।

अधिक मास में क्या करना चाहिए? (इन कार्यों से चमकेगी किस्मत)

यह महीना आत्मिक शुद्धि और प्रभु की भक्ति के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान नीचे दिए गए कार्यों को करने से घर में सुख-समृद्धि आती है:

  •  भगवान विष्णु और कृष्ण जी की पूजा: इस पूरे महीने सुबह-शाम भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की आराधना करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का नियमित जाप आपके जीवन के सभी कष्टों को काट सकता है।
  • महादान का महत्व: अधिक मास में दान करने का फल अनंत गुना होता है। इस महीने में गरीबों को अन्न, जल, पीले वस्त्र, सत्तू, और विशेषकर तांबे के बर्तन में मालपुए रखकर दान करने की प्राचीन परंपरा है।
  • तीर्थ यात्रा और पवित्र स्नान: यदि संभव हो, तो इस महीने में किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा या यमुना) में स्नान करें। अगर बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • दीपदान करें: इस महीने शाम के समय तुलसी के पौधे के पास और घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जरूर जलाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां लक्ष्मी का वास होता है।
  • रामायण और भागवत कथा का पाठ: इस पावन समय में श्रीमद्भागवत पुराण या रामायण की कथा सुनना या पढ़ना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है।

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए? (भूलकर भी न करें ये गलतियां)

चूंकि इसे मलमास भी कहा जाता है, इसलिए इस महीने में सांसारिक और मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। आपको इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • मांगलिक कार्य हैं वर्जित: इस पूरे महीने में विवाह (शादी), मुंडन, यज्ञोपवीत (जनेऊ संस्कार), गृह प्रवेश, या नए घर की नींव रखना जैसे शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह से वर्जित होते हैं।
  • तामसिक भोजन से दूरी: अधिक मास के दौरान भूलकर भी मांस, मदिरा (शराब), लहसुन, प्याज और नशीली चीजों का सेवन न करें। इस महीने पूरी तरह सात्विक जीवन जीना चाहिए।
  • विवाद और झूठ से बचें: इस पवित्र महीने में किसी का दिल न दुखाएं, न किसी से झूठ बोलें और न ही घर में कलह-क्लेश होने दें। किसी की निंदा या बुराई करने से आपका पुण्य नष्ट हो सकता है।
  • नई वस्तुओं की खरीदारी से बचें: हालांकि रोजमर्रा की चीजें खरीदी जा सकती हैं, लेकिन बहुत जरूरी न हो तो नई गाड़ी, नया मकान या सोने-चांदी के बड़े आभूषण इस महीने खरीदने से बचना चाहिए।

अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का धार्मिक महत्व क्यों है इतना बड़ा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाने के लिए इस 'अधिक' महीने का निर्माण हुआ, तो इसका कोई स्वामी नहीं था। इस वजह से इसे 'मलमास' कहकर इसकी निंदा होने लगी। तब दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया। भगवान विष्णु ने दया करके इस महीने को अपना नाम दिया 'पुरुषोत्तम मास'। उन्होंने वरदान दिया कि जो भी इस महीने में मेरी भक्ति करेगा, उसके जीवन के सारे पाप धुल जाएंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास हमारे व्यस्त जीवन में एक 'रिसेट बटन' की तरह है, जो हमें भौतिक दुनिया से थोड़ा दूर हटाकर ईश्वर के करीब लाता है। साल 2026 का यह अधिक मास आपके और आपके परिवार के जीवन में नई खुशियां और सकारात्मकता लेकर आए, यही बप्पा से प्रार्थना है। इस महीने नियमों का पालन करते हुए प्रभु भक्ति में मन लगाएं।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख पंचांग की गणनाओं, धार्मिक मान्यताओं और सनातन परंपराओं पर आधारित है। अपनी स्थानीय परंपराओं के अनुसार नियमों में थोड़ा बहुत बदलाव संभव है।


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