अधिक मास फूड गाइड 2026: जानिए इस पवित्र महीने में क्या खाएं और किन चीजों से करें पूरी तरह परहेज
17 मई 2026 से ज्येष्ठ अधिक मास (जिसे हम पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहते हैं) की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू धर्म में इस महीने का महत्व किसी त्योहार से कम नहीं है। यह पूरा 1 महीना यानी 15 जून 2026 तक चलेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि यह 1 महीना हमारे तन और मन को शुद्ध करने के लिए आता है। अब मन की शुद्धि तो भगवान के भजन से हो जाएगी, लेकिन तन की शुद्धि के लिए हमारी रसोई के नियमों का ठीक होना बहुत जरूरी है।
अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि अधिक मास के दौरान घर में क्या पकाना चाहिए और क्या नहीं। इसलिए आज के इस ब्लॉग में हम आपके लिए लाए हैं एक बेहद आसान 'अधिक मास डाइट चार्ट', ताकि आपसे अनजाने में भी कोई गलती न हो और आपको इस महीने का पूरा पुण्य मिले।
अधिक मास में क्या खाना चाहिए? (पवित्र भोजन की लिस्ट)
इस महीने में केवल सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। सात्विक भोजन का मतलब है वह खाना जो आसानी से पच जाए और आपके दिमाग को शांत रखे। आप अपनी रसोई में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं:
- अनाज और दालें: रोजाना के खाने में आप गेहूं, चावल, जौ, और मूंग की धुली दाल का इस्तेमाल कर सकते हैं
- सब्जियां: हरी और हल्की सब्जियां जैसे लौकी, तोरई, कद्दू , खीरा और परवल खाना सेहत और धर्म दोनों के लिहाज से बेस्ट हैं।
- फल: ज्येष्ठ के महीने में आने वाले मौसमी फल जैसे आम, केला, तरबूज और खरबूजा खाएं।
- डेयरी प्रोडक्ट्स: गाय का दूध, शुद्ध देसी घी, और दही को इस महीने में अमृत समान माना गया है।
- मसाले और नमक: इस महीने साधारण समुद्री नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करें। मसालों में आप जीरा, हल्दी और काली मिर्च का प्रयोग कर सकते हैं।
भूलकर भी न खाएं ये चीजें (वर्जित भोजन की लिस्ट)
अधिक मास में कुछ चीजों को खाने की सख्त मनाही होती है। माना जाता है कि इन चीजों को खाने से शरीर में आलस बढ़ता है और पूजा-पाठ करने में मन नहीं लगता हैं।
- प्याज और लहसुन: यह तो हम सब जानते हैं कि इन्हें तामसिक माना जाता है, इसलिए पूरे महीने इनसे पूरी तरह दूरी बना लें।
- वर्जित सब्जियां और दालें: शास्त्रों के अनुसार इस महीने बैंगन, मूली, और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए। मसूर की दाल को भी इस दौरान अशुद्ध माना जाता है।
- तेल और मसाले: खाना पकाने के लिए सरसों के तेल या राई का इस्तेमाल करने से बचें। इसकी जगह आप मूंगफली का तेल या घी यूज कर सकते हैं।
- नशीली और मांसाहारी चीजें: मांस, मछली, अंडा और मदिरा (शराब) का ख्याल भी मन में न लाएं।
- बासी और दोबारा गर्म किया खाना: फ्रिज में रखा बासी खाना या एक बार पकने के बाद दोबारा गर्म किया हुआ भोजन इस महीने बिल्कुल न खाएं। हमेशा ताजा भोजन ही ग्रहण करें।
एक समय भोजन क्यों है जरूरी?
अधिक मास में एकभुक्त व्रत ( एक बार का भोजन ) का बहुत बड़ा महत्व है। इसका मतलब है कि चौबीस घंटे में केवल एक बार (या तो दोपहर में या शाम को) भरपेट सात्विक भोजन करना।
आज की मॉडर्न भाषा में कहें तो इसे इंटरमिटेंट फास्टिंग' (Intermittent Fasting) या 'बॉडी डिटॉक्स' कहा जाता है। चूंकि ज्येष्ठ के महीने में भयंकर गर्मी होती है, इसलिए एक समय खाने से हमारे पाचन तंत्र (Digestion) को आराम मिलता है और शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है। हमारे पूर्वजों ने इसे धर्म से इसलिए जोड़ा ताकि हम अपनी सेहत का ख्याल रख सकें।
निष्कर्ष (Conclusion)
तो दोस्तों, अधिक मास केवल व्रत-उपवास का नहीं, बल्कि खुद को अंदर से साफ और सेहतमंद बनाने का एक शानदार मौका है। इस फूड गाइड को फॉलो करें, हल्का और सात्विक खाएं, और भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

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